हमारा प्रकाशन

प्रकाशन -

श्रेष्ठ हिन्दी साहित्य के माध्यम से व्यकित, समाज व राष्ट्र को सही दिशा बोध कराने वाले चिन्तन को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाकर हिन्दी साहित्य की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से समिति प्रकाशन योजना भी संचालित कर रही है।


वर्ष 2000 से समिति ने 'सृजन-यात्रा' नाम से रचनाकारों के व्यकितत्व और कृतित्व पर केनिद्रत प्रकाशन माला प्रारम्भ की है।

इसके अंतर्गत श्री गोविन्द मिश्र, श्री नरेश मेहता, श्री शैलेश मटियानी, डा. शिवमंगलसिंह सुमन, डॉ. रामकमल राय और पदमश्री रमेशचन्द्र शाह पर पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त पावस व्याख्यानमाला के विमर्श पर आधारित 'संवाद और हस्तक्षेप नामक प्रकाशन के 18 खण्ड प्रकाशित हो चुके हैं। इसी प्रकार शरद और बसंत व्याख्यानमाला में दिए गए व्याख्यानों पर आधारित 'मंथन पुसितका' भी प्रकाशित की जाती है।

श्री कैलाशचन्द्र पन्त द्वारा लिखित 'शब्द का विचार पक्ष', 'धुंध के आर-पार', एवं 'कौन किसका आदमी' भी प्रकाशित हैं। इसके अतिरिक्त आंचलिक बोलियों से संबंधित दस्तावेज भी प्रकाशित किए गए हैं। 'मालवांचल में कूर्मांचल', 'चिन्ता और चिंतन' तथा मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के परिचय ग्रंथ का भी प्रकाशन हुआ है।

आंचलिक बोलियो के हितार्थ प्रयास एवं प्रकाशन-

समिति की मान्यता है कि हिन्दी की प्रगति में आंचलिक बोलियों की और आंचलिक बोलियों की प्रगति में हिन्दी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी समन्वयकारी भावना के अनुरूप समिति मालवी, बुंदेली और निमाड़ी आंचलिक
बोलियों के संबंध में क्रमश: उज्जैन, ओरछा, और खंडवा में संगोषिठयाँ आयोजित कर चुकी है जिसमें सुप्रसिद्ध साहित्यकारों एवं विद्वानों ने भागीदारी की। इन संगोषिठयों के विमर्श पर आधारित दो दस्तावेज 'मालवी की उपबोलियाँ' और
उनका सांस्कृतिक परिवेश और बुंदेली के विविध आयाम समिति द्वारा पुस्तकाकार प्रकाशित किए गए हैं। निमाड़ी के दस्तावेज का प्रकाशन प्रक्रिया चल रही है। शीघ्र ही लोक गाथाओं की पुस्तक प्रकाशित करने की योजना है।

अक्षरा-

हिन्दी भवन की प्रगति-यात्रा की एक बड़ी उपलबिध द्वैमासिक साहितियक पत्रिका 'अक्षरा' है। यह पत्रिका लगातार 30 वर्षों से प्रकाशित हो रही है।
इसकी यशस्वी प्रकाशन यात्रा मइ-जून 2013 के अंक के साथ 126वें अंको तक पहँच गइ है। प्रारंभ में यह त्रैमासिक पत्रिका थी जिसे सन 2001 के अंक 51
से द्वैमासिक कर दिया गया है। बड़े प्रकाशन संस्थान के लिए तो प्रगति की यह ऊँचाई सहज हो सकती है, किंतु अपने  संसाधनों से अशासकीय संस्था
द्वारा इतनी लम्बी अवधि तक  साहित्यिक पत्रिका को जारी रखना बड़ा कठिन काम है। आज 'अक्षरा' की गणना देश की श्रेष्ठ साहित्यिक पत्रिकाओं में होती है।
देश और विदेश के प्रतिषिठत लेखक 'अक्षरा' में छपने को अपने लिये गौरव की बात मानते हैं। पत्रिका को अपनी इस प्रकाशन यात्रा में प्रख्यात
साहित्यकार डा. प्रभाकर श्रोत्रिय तथा श्री गोविन्द मिश्र जैसे सुप्रसिद्ध विद्वानों का संपादकीय सहयोग मिला है। बहुत ही विनम्र भाव से यह उल्लेख करना भी
प्रासंगिक होगा कि 'अक्षरा' अब मात्र एक साहित्यिक पत्रिका नहीं रह गई है अपितु प्रखर अग्रलेखों और अन्य आलेखों के कारण एक वैचारिक आंदोलन का
रूप ले चुकी है और सोये हुए समाज तथा राष्ट्र को जगाने एवं राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा के लिए सन्नद्ध होने हेतु मानसिक रूप से तैयार कर रही है।
पत्रिका पर प्राप्त होने वाली व्यापक पाठकीय प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि 'अक्षरा' की आवाज बहुत दूर तक जाती है। प्रसन्नता की बात है कि उसकी
अंतध्र्वनि सुनने-गुनने वालों की संख्या भी दिनोंदिन बढ़ रही है। वैचारिक जड़ता को तोड़ने का जो आंदोलन हिन्दी भवन चला रहा है, 'अक्षरा' अब उसमें
प्रभावी भूमिका निभाने लगी है। इस लम्बी यात्रा में अक्षरा के कई विशेषांक भी प्रकाशित हुए जो संग्रहणीय है। कुछ प्रमुख विशेषांकों का विवरण इस प्रकार है-

1. प्रेमकथा विशेषांक 1993 अंक 44 अप्रैल-जून
2. आलोचना विशेषांक  2000 अंक 50 अक्टूबर-दिसम्बर
3. शैलेश मटियानी विशेषांक  2001 अंक 56 नवम्बर-दिसम्बर
4. रंगमंच विशेषांक  2003 अंक 63 जनवरी-फरवरी
5. कथा सम्राट मुशी प्रेमचन्द 2004 अंक 72 जुलाइ-अगस्त
6. सुभद्रा कुमारी चौहान 2008 अंक 73 सितम्बर-अक्टूबर
7. समीक्षा विशेषांक 2004 अंक 74 नवम्बर-दिसम्बर
8. रवीन्द्रनाथ त्यागी विशेषांक 2005 अंक 75  जनवरी-फरवरी
9. निर्मल वर्मा विशेषांक 2006 अंक 83 जुलाइ-अगस्त
10.  शतांक 2009 अंक 100  मार्च-अप्रैल
11. डा. राममनोहर लोहिया विशेषांक 2010  अंक 107 मइ-जून
12. पदमश्री रमेशचन्द्र शाह विशेषांक 2011  अंक 113 मार्च -अप्रैल
13. कहानी विशेषांक 2013 अंक 125 मइ-जून

अक्षरा पत्रिका की सदस्यता के लिये चेक, बैंक ड्राफ्ट या मनी आर्डर म. प्र. राष्ट्रभाषा प्रचार समिति 'अक्षरा', हिन्दी भवन, श्यामला हिल्स, भोपाल- 462 002 के नाम भेज कर प्राप्त की जा सकती है।

            एक प्रति 20 रू.
            वार्षिक शुल्क 120 रू.
            आजीवन 1,200 रू.

विदेश के लिये-

           एक प्रति 4 डालर
           वार्षिक शुल्क 70 डालर

म. प्र. राष्ट्रभाषा प्रचार समिति का प्रकाशित साहित्य-

क्र पुस्तक का नाम  सम्पादक /लेखक    मूल्य
1. परिचय ग्रंथ श्री बैजनाथ प्रसाद दुबे (सं.) 40 रू.
2. कौन किसका आदमी श्री कैलाशचन्द्र पन्त  75 रू.
3. धुंध के आर-पार श्री कैलाशचन्द्र पन्त   100 रू.
4. शब्द का विचार पक्ष श्री कैलाशचन्द्र पन्त  200 रू.
5. मालवांचल में कूर्मांचल डा. श्यामसुन्दर निगम, डा. शिव चौरसिया (सं)  600 रू.
6. संवाद और हस्तक्षेप खंड   150 रू.प्रति खंड
  (खंड 1 से 10 एवं 12) श्री विजय कुमार देव (सं)  
  (खंड 11, 13 एवं 14) डा. सुनीता खत्री (सं)  
       

'संवाद और हस्तक्षेप पावस व्याख्यान माला के अन्तर्गत
विद्वानो के द्वारा व्यक्त किये गये विचारो  का अनूठा संकलन है।

 

7. सृजन यात्रा : गोविन्द मिश्र डा. उर्मिला शिरीष (सं.) 75 रू.
8. सृजन यात्रा : नरेश मेहता श्री प्रमोद तिवारी (सं.) 75 रू.
9. सृजन यात्रा : शैलेश मटियानी कैलाशचन्द्र पन्त (सं.) 100 रू.
10.  सृजन यात्रा : डा. शिवमंगलसिंह सुमन आशा शुक्ला (सं.) 125 111.
11.  सृजन यात्रा : रमेशचन्द्र शाह   प्रो. रमेश दवे, विजय कुमार देव (सं.)  145 रू.
12. सृजन यात्रा : डा. रामकमल राय डा. सुनीता खत्री (सं.) 150 रू.
13. मंथन-1 बढ़ती हुई हिंसक प्रवृत्तियाँ : बुनियादी पड़ताल  डा. आशा शुक्ला (सं) 25 रू.
14. मंथन-2 : ताकि संवाद जारी रहे डा. आशा शुक्ला (सं) 70 रू.
15. मंथन-3 : राजनीति, अपराध और समाज आशा शुक्ला (सं) 100 रू.

 

मंथन 1 से 3 में बसंत एवं शरद व्याख्यान माला के अन्तर्गत
विद्वानो के द्वारा व्यक्त किये गये विचारो का अनूठा संकंलन है।

 

16. मालवी की उपबोलियाँ और उनका सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य डा. श्यामसुन्दर निगम (सं.) 100 रू.
17.  बुन्देली के विविध आयाम श्री युगेश शर्मा (सं)  150 रू.
18. चिन्ता और चिन्तन श्री युगेश शर्मा (सं.)  200 रू.

 

नोट : उक्त प्र्रकाशनो के क्रय पर समिति द्वारा
25 प्रतिशत की विशेष छूट दी जायगी।

प्रकाशन मंगाने हेतु म. प्र राष्टभाषा प्रचार समिति, भोपाल के नाम से ड्राफ्ट भेजे।